"उड़ने वाले बीज" | Flight seeds in India |
उड़ने वाले बीज" का मतलब उन बीजों से है जो हवा से फैलते हैं, जिससे वे मूल पौधे से लंबी दूरी तय कर सकते हैं।
"उड़ने वाले बीज" का मतलब उन बीजों से है जो हवा से फैलते हैं, जिससे वे मूल पौधे से लंबी दूरी तय कर सकते हैं। भारत में, ऐसे कई पौधे हैं जिनके बीज हवा के फैलाव के लिए अनुकूलित हैं, ऐसी संरचनाओं के कारण जो उन्हें हवा में "उड़ने" या सरकने की अनुमति देती हैं। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं:
1. मोरिंगा (मोरिंगा ओलीफ़ेरा): (Moringa oleifera) ड्रमस्टिक ट्री के रूप में भी जाना जाता है, इसके बीज फली में बंद होते हैं जिन्हें हवा द्वारा कम दूरी तक ले जाया जा सकता है।
2. टीक (टेक्टोना ग्रैंडिस): (Tectona grandis) टीक के पेड़ के बीज हल्के होते हैं और उनके छोटे पंखों या ब्रैक्ट्स के कारण हवा द्वारा ले जाए जा सकते हैं।
3. कपास (गोसिपियम एसपीपी): (Gossypium spp.) कपास के बीज रेशों से घिरे होते हैं जो उन्हें हवा द्वारा ले जाने में मदद करते हैं।
4. शोरिया रोबस्टा (साल): (Shorea robusta (Sal) साल के पेड़ के बीजों में पंख जैसी संरचना होती है जो उन्हें हवा द्वारा ले जाने की अनुमति देती है।
5. एलस्टोनिया स्कोलारिस (इंडियन डेविल ट्री): (Indian Devil Tree) यह अपने हल्के बीजों के लिए जाना जाता है, जिनमें बालों के गुच्छे होते हैं, जिससे उन्हें हवा द्वारा फैलाया जा सकता है।
ये तो बस कुछ उदाहरण हैं। हवा द्वारा फैलाव कई पारिस्थितिकी प्रणालियों में एक आम रणनीति है, और भारत में, विभिन्न पौधों ने बीज फैलाव के इस तरीके को अपनाया है।
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