`` सद्भावना ``
प्रीत-प्रेम लिए आज देखो हरियाली है खुशियाली है
जहा देखो हरियाली है उमंग लिए तरंग लिए खुशियों के संग लिए।
आज के खुशियाली मौसम में हमारा संग आयेशा हो जैसे सतरंगी रंग लिए हो इंद्रधनुष जैसा हो वैसे ही हम विभिन्न रंगो में रंगे (हमारी संस्क्रति ) जैसा हो सद्भावना हो भाईचारा हो शांति हो।
भले ही हम सोने की किलो में न रहते हो , भले ही फिर से मिल्क की नदिया न बहती हो मेरे देश में भी हे ,प्रभु मेरे देश में फिर से शांति हो सद्भावना हो भाई चारा हो।
रहे हम मिल-जुल एक-दूसरे के संग -उमंग लिए तरंग लिए खुसियो के संग लिए रहे हमारी आयेशी सद्भावना न किसी का अपमान हो न किसी का तिरस्कार हो.
और करे हम ऐसी सद्भावना जिससे हर छोटे-बड़े किसी का सम्मान हो सद्भावना हो भाईचारा हो शान्ति हो
हे ! प्रभु मेरे वतन में वतन के वासियो में फिर से सद्भावना हो शान्ति हो भाईचारा हो।
हो फूलो की तरह खुशियाँ बिखेरे हम जैसे नदिया बहती है और नदियों के संग ,मेरे देश में भी परदेश में भी हो हमारी ऐसी सद्भावना वासुदेव कुटुंबकम की हो फिर से अहवाहना।।
प्रीत-प्रेम लिए आज देखो हरियाली है खुशियाली हैजहा देखो हरियाली है उमंग लिए तरंग लिए खुशियों के संग लिए।
आज के खुशियाली मौसम में हमारा संग आयेशा हो जैसे सतरंगी रंग लिए हो इंद्रधनुष जैसा हो वैसे ही हम विभिन्न रंगो में रंगे (हमारी संस्क्रति ) जैसा हो सद्भावना हो भाईचारा हो शांति हो।
भले ही हम सोने की किलो में न रहते हो , भले ही फिर से मिल्क की नदिया न बहती हो मेरे देश में भी हे ,प्रभु मेरे देश में फिर से शांति हो सद्भावना हो भाई चारा हो।
रहे हम मिल-जुल एक-दूसरे के संग -उमंग लिए तरंग लिए खुसियो के संग लिए रहे हमारी आयेशी सद्भावना न किसी का अपमान हो न किसी का तिरस्कार हो.
और करे हम ऐसी सद्भावना जिससे हर छोटे-बड़े किसी का सम्मान हो सद्भावना हो भाईचारा हो शान्ति हो
हे ! प्रभु मेरे वतन में वतन के वासियो में फिर से सद्भावना हो शान्ति हो भाईचारा हो।
हो फूलो की तरह खुशियाँ बिखेरे हम जैसे नदिया बहती है और नदियों के संग ,मेरे देश में भी परदेश में भी हो हमारी ऐसी सद्भावना वासुदेव कुटुंबकम की हो फिर से अहवाहना।।
No comments:
Post a Comment